ओवरथिंकिंग: एक बगीचा, एक आईना और एक अनदेखी सच्चाई

दर्शनशास्त्र और मनोविज्ञान पढ़ते-पढ़ते एक बात गहराई से समझ में आ गई—
जब भी किसी से नाराज़गी हो, तो एक बार उसकी जगह खुद को रखकर देखो।
अक्सर पाएंगे कि आपकी नाराज़गी का आधा से ज़्यादा हिस्सा वहीं खत्म हो जाएगा।

असल में ज़्यादातर झगड़े इस बात से होते हैं कि सामने वाला आपका पक्ष नहीं समझ रहा,
और आप उसका। जबकि हो सकता है, दोनों अपनी-अपनी जगह सही हों।
कभी-कभी जिसे आप नाराज़ समझ रहे हैं, हो सकता है वह अपने जीवन की ही किसी नाराज़गी से जूझ रहा हो।

मैं और मेरी ओवरथिंकिंग

मैं इन परिस्थितियों को शायद ज़्यादा झेलता हूँ, क्योंकि मैं एक ओवरथिंकर हूँ।
और मुझे इसमें कोई बुराई भी नहीं लगती।
ओवरथिंकिंग वैसी ही है जैसे आपने बगीचे में तरह-तरह के फूल लगाए हों—
वो उगें या न उगें, पर घास ज़रूर उगेगी, क्योंकि आप रोज़ पानी दे रहे हैं।
बस वही घास, मेरे दिमाग़ में भी उगती रहती है—
किसी न किसी रूप में, हर दिन।

भारत में ओवरथिंकिंग का मज़ेदार चेहरा

हाल ही में मैंने एक रिपोर्ट पढ़ी—
61% भारतीय इस बात पर ओवरथिंक करते हैं कि पिज़्ज़ा पर कौन-सी टॉपिंग डालें!
मतलब, देशवासियों को चुनाव में नेता चुनने से ज़्यादा
रेस्टोरेंट में खाना चुनने की टेंशन है।
चुनाव में सिर्फ 39% को दिक्कत होती है,
लेकिन खाने के मामले में 61% कन्फ्यूज रहते हैं।

और मैं इससे पूरी तरह सहमत हूँ।
क्योंकि नेता तो हम पाँच साल में एक बार चुनते हैं,
पर खाना हमें तीन-चार दिन में एक बार चुनना पड़ता है—
वो भी सीधे हमारे पेट और जीवन-मरण के सवाल से जुड़ा है!

ओवरथिंकर का प्यार और रिश्ते

ओवरथिंकर बड़ा अनोखा इंसान होता है।
अगर वो आपसे प्यार करता है, तो इसका मतलब है कि
उसने पहले ही सौ बार सोच लिया है कि आपसे प्यार न करने के क्या कारण हो सकते हैं—
और फिर भी उसने प्यार चुना है।

अगर आपसे उसका कोई विवाद हुआ, तो वह आपके अंदर के
कन्फ्लिक्ट को भी खुद ही अपने भीतर हल करने की कोशिश करेगा।
क्योंकि उसका मानना है—अगर वो आपसे प्रेम करता है,
तो आपके हिस्से की नाराज़गी का भी बचाव उसे ही सोचना चाहिए।

मैसेज, इंस्टाग्राम और मेरी मुश्किलें

सेंटर फ्रेश की एक रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि
लोग इंस्टाग्राम पर स्टोरी डालने में भी पाँच घंटे लगा देते हैं!
मेरे केस में तो टेक्स्ट रिप्लाई करने में भी वक्त लग जाता है।
कभी-कभी जिनसे सच में बात करनी होती है, उन्हें भी जवाब नहीं दे पाता—
क्योंकि सोचते-सोचते टाइम निकल जाता है।

अगर कोई बहुत गर्मजोशी से मैसेज करे,
तो उसी गर्मजोशी से जवाब देने के लिए
मुझे सोचने का समय चाहिए होता है।
और इसी सोच में कभी-कभी दिन निकल जाते हैं,
और मैं भूल भी जाता हूँ।

प्यार में उम्मीदों का जाल

कभी-कभी किसी को बहुत पसंद करने पर
उसकी नाराज़गियाँ भी स्वाभाविक होती हैं।
लेकिन असली चुनौती तब आती है जब रिश्ता
‘एक्सेप्टेंस’ से ‘एक्स्पेक्टेंस’ में बदल जाता है।
आप सामने वाले को समझने की जगह
अपनी बनाई हुई छवि (बबल रेप्यूटेशन) से लड़ रहे होते हैं—
जो असलियत में होती ही नहीं।

ओवरथिंकिंग का उजला पहलू

हाँ, ओवरथिंकिंग के फ़ायदे भी हैं—
आप हर बात पर ध्यान देते हैं।
किसी से पहली मुलाकात, पहला मैसेज, पहला फ़ोन कॉल—
क्या कहेंगे, कैसे कहेंगे, कैसे ग्रीट करेंगे—
सब पहले से सोच रखा होता है।

निष्कर्ष:
ओवरथिंकिंग एक बगीचे की तरह है—
अगर सही बीज बोएं, तो ये सुगंध फैलाती है,
और अगर लापरवाही करें, तो सिर्फ़ घास ही उगेगी।
यह आप पर है कि इस बगीचे को बोझ बनाना है
या इसे एक खूबसूरत सोच का घर।

2 responses to “ओवरथिंकिंग: एक बगीचा, एक आईना और एक अनदेखी सच्चाई”

  1. very nice lines….I feel it’s true on me

    Like

Leave a comment

Design a site like this with WordPress.com
Get started