“हर इंसान के भीतर एक कहानी होती है — जो अक्सर अनकही रह जाती है, बस सुने जाने की आस में चुपचाप बैठी होती है। हम सब खुलना चाहते हैं, अपना बोझ किसी के साथ बाँटना चाहते हैं। और इसके लिए बस एक ऐसा इंसान चाहिए — जो प्रेम से, सम्मान से, और बराबरी की भावना से पूछे। जो सिर्फ जवाब पाने के लिए नहीं, बल्कि सच में समझने के लिए सुने — पूरे ध्यान से, बिना टोके, बिना तोड़े।

हाल के दिनों में मैंने अपने भीतर कुछ बदलते हुए महसूस किया है।
मैं पहले ऐसा इंसान था, जिसके पास हर सवाल का जवाब होता था — हर बात पर एक राय, हर स्थिति में कुछ कहने की जल्दी।
मैं इतना बोलता था कि दूसरों को बोलने की जगह ही नहीं मिलती थी।

लेकिन अब… मौन मुझे शब्दों से अधिक सुकून देने लगा है।
अब मुझे हर बात पर राय बनानी नहीं आती। अब मैं बस सुनना चाहता हूँ — लोगों की आवाज़ नहीं, उनके मौन को; उनके शब्दों के पीछे छिपे एहसासों को।
अब मुझे जवाब देने की उतनी ज़रूरत नहीं लगती — शायद इसलिए क्योंकि मैंने महसूस करना सीख लिया है।
अब मैं सवाल नहीं ढूंढता, मैं सिर्फ लोगों को समझना चाहता हूँ।
और शायद… यही समझ, यही मौन — असल में सबसे गहरी ताक़त है।”**

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