(When only I’m left in love)
प्यार… एक beautiful feeling होती है।
एक connection जो दो लोगों के बीच दिल से बनता है।
पर एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए —
Love is not one-sided.
अगर आप ही बार-बार effort कर रहे हो,
आप ही हर बार call कर रहे हो,
आप ही time दे रहे हो,
और सामने वाला सिर्फ busy है…
तो ये प्यार नहीं, compromise है।
कई बार हम उस इंसान से प्यार करने लगते हैं
जो हमें कुछ भी return में नहीं दे रहा होता —
ना time, ना love, ना care.
फिर भी हम रुक जाते हैं।
क्यों?
क्योंकि हमने उसे दिल से चाहा होता है।
But remember,
झुकना तभी तक ठीक है जब तक आपकी रीढ़ की हड्डी में दर्द ना हो।
Once it starts hurting your dignity, your identity —
It’s time to stand up.
कभी ऐसा moment आता है जब आप feel करते हो:
“I’m not me anymore. I’ve lost myself in this relationship.”
That’s the time when you need to walk away, silently —
with grace, not anger.
Because जब मोहब्बत one-sided हो जाए,
तो वो love नहीं burden बन जाती है।
और जब आप किसी की life में रहने के लिए गिड़गिड़ाने लगते हो,
तो आप धीरे-धीरे अपनी value खो देते हो।
Yes, Breakup is painful.
It’s the worst phase.
क्योंकि आप किसी ऐसे इंसान को छोड़ रहे होते हो
जिसके साथ आपने हजारों सपने देखे,
जिसे आपने दिल से जिया।
But if you don’t rise from that pain,
if you stay stuck in that hurt —
You’re failing yourself.
हर रिश्ता मंज़िल तक नहीं जाता।
कुछ रिश्तों को बस एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ देना ही better होता है।
Because every love story doesn’t need a “happily ever after.”
कुछ stories बस एक lesson बनकर आती हैं —
ताकि आप खुद को समझ सको,
और खुद से फिर से प्यार कर सको।
नायाब(meri favourite poetess)की कविता: “तू है तो…”
नायाब की यह कविता उस एहसास को बयां करती है जब कोई खास हमारे जीवन में होता है:
नायाब कहती है –
तू है तो लगता है, है कोई जो मुझे चाह सकेगा।
हाँ, मैं हूँ अल्हड़ थोड़ी, हाँ मैं हूँ ज़िद्दी,
तेरे होने से है कोई, जो मुझे मना सकेगा।
तेरी आदतों में, कितनी मेरी हरकतों में घर ढूँढा है।
तेरे न होने से लूट जाएँगी छतें कई।
सपनों का एक घर है मेरा, सब कहते हैं – घर सपनों में ही ऐसा होता है।
तेरे होने से लगता है वो घर मेरा, और वो घर तू मेरा, मेरे साथ बसा सकेगा।
तू है तो है कोई जो मुझे चाह सकेगा, और मैं हूँ, मोहब्बत के लायक — ये कोई मुझे बता सकेगा“तू नहीं है…
ise maine likha jb insan na rhe to jindgi kaisi hogi
तू नहीं है, तो लगता है जैसे कोई था ही नहीं जो मुझे चाह सकता था।
हाँ, मैं हूँ अल्हड़ थोड़ा, हाँ मैं हूँ ज़िद्दी,
पर अब कौन है जो मेरी ज़िदों को समझ सकेगा?तेरी आदतों में जो मेरा अक्स था, अब हर आदत अजनबी सी लगती है।
तेरे न होने से जैसे छत ही नहीं बची, अब ख्वाब भी भीग जाते हैं, बारिशों में।एक घर था सपनों में, अब वो भी वीरान सा लगता है।
सब कहते हैं — ऐसे घर तो सपनों में ही होते हैं,
अब लगता है वो सपना भी तुझ संग चला गया।तू नहीं है, तो कोई नहीं जो मुझे चाह सके।
और अब मैं… मोहब्बत के लायक हूँ भी या नहीं — कौन बताएगा?
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