आंसू कुछ कहते हैं –

आंसू कुछ कहते हैं-
  आंसू सिर्फ दुख ही नहीं बल्कि सुख के भी होते हैं l आंसू सदा उदासी का ही प्रमाण थोड़ी ना लाते हैं, आंसू  उत्सव का भी खबर लाते हैं l आंसू का एक ही अर्थ है जो कुछ भी हम शब्दों में नहीं कह पाते वह आंसुओं के कहना पड़ता है l आंसू तो बड़ी गहरी अभिव्यक्ति है आंसू का अर्थ पूछते हो आंसू के अर्थ भाषा में समाते तो मैं रोता क्यों ?कविता या कहानी ना लिखता l जब भाषा असमर्थ हो जाती है तो आंखों से आंसू बहते हैं l जो बात हम किसी भी विधा पर नहीं कर पाते वह रो रो कर कहते हैं आंसू कुछ कहते हैं जो किसी और विधा में नहीं कहा जा सकता l कुछ ऐसा कहते हैं जो शब्दों में आता नहीं और बनता नहीं l शब्दों की सीमा है पर  आंसू असीम है l जब भी हमारे मन में कोई भाव इतना घना हो जाए चाहे सुख हो या चाहे दुख,  चाहे शांति हो या अशांति, चाहे उदासी या उत्सव, कोई भी भाव जब इतना घना हो जाए कि तुम उसे संभाल  ना सकोगे तो वही भाव आंखों से बहता है l आंसुओं को कभी रोकना मत और ना ही तो बहाने की चेष्टा मत करना l जहां कोई लोक लाज थोड़ी करनी है मीरा ने भी तो कहा था l  सब  लोक लाज खोई l अगर आंसू रोक लिए तो मुस्कुराहट भी रुक जाएगी क्योंकि उसी द्वार से मुस्कुराहट भी आती है जहां से आंसू आते हैं l वहीं से गीत भी पैदा होते हैं जहां से आंसू पैदा होते हैं lवहीं से उत्सव झरता है जहां से उदासी पैदा होती हैl  तुम हल्के बनो तुम सहज बनो जो आए उसे आने दो जैसा आए वैसा ही आने दो l तुम जरा भी हेरफेर मत करना lदोनों तरह की संभावनाएं हैं कुछ लोग जो नहीं रो सकते वे रोने की चेष्टा ना करें वह गलत हो जाएगा l अभी अपने से नहीं आए हैं तो प्रतीक्षा करो और कुछ लोग जो रो सकते हैं उन्हें भी भय लगता है कि कोई क्या कहेगा पास पड़ोस के लोग क्या कहेंगे l गांव में खबर होगी तो लोग समझेंगे पागल है बुद्धि खराब हो गई तो आदमी आंसुओं को रोकता है जबकि जब आंसू आए दिल खोल कर रोइए उन्हें आने दीजिए l
 

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